अजीब लोग

कुछ बातें अजीब सी होती है
कुछ लोग भी
सोचती हूँ
चुप रहूंगी
नहीं अपनी चोट नहीं दिखाउंगी
नहीं कुछ किसीसे नहीं कहूँगी
पर जब दिल टूट जाएं
आंसू रुखने का नाम न ले
तब क्या कहे
क्या न कहे
कुछ लोगोंकी
फितरत ही अजीब है
आगे दोस्त
पीछे दुश्मन
भाई कह
दिया होता
दिल खोलखे न देती
क्यों दोस्त बनके
दिल दुखाते हो
सीधा सीधा दुश्मनी निभाती
कुछ मज़ा मुझे भी आता
बस इतना कहूँगी
विश्वास अभी भी मज़बूत है
आगे बहुत कुछ करना है
जीना है जी भरके
बस ऐसे हार
हमने कभी नहीं माना है
तो आज क्यों रोयेंगे
बताओ आज कैसे रुखेंगे
जब भी हारते है
और जीना का जी करता है
यूँ समज लो
जीना भी एक तरीके का जीत ही होता है